Search This Blog

Thursday, May 21, 2020


By Ashok Kumar

                        

गज़ल

कत्ल करके कहती है जालिम ,कातिल नही हूँ  मै
सिसक रहा मासुम सा दिल मेरा गालिब नही हूँ  मै

खाक मे मिला के मुझे देखो कैसे मुस्कुरा रही है
नरम टूकडो को दिल के देखो कैसे सहला रही है

कितनी मासुमियत से देखो अपने अश्को को बहा रही है
गिला नही  मुझे मौत से  मगर देखो वो उस गली जा रही है

बिखर गया हूँ आज सुखे पत्तो की तरह इस जहाँन मे
खुश रहे तू सदा  रुह से मेरी यही आवाज आ रही है

INDIA
MAY 19,2020
©®
ASHOK KUMAR
PRINCIPAL
INTERNATIONAL PEACE ACTIVIST
INTERNATIONAL BILINGUAL POET
AMBASSADOR OF IFCH
NEW BASTI PATTI CHAUDHARAN
BARAUT BAGHPAT
UTTAR PRADESH

No comments:

المنتدى الدولي للإبداع والإنسانية المملكة المغربية

 5th International Poetry  Festival of Naoussa ARISTOTLE AND THE WORLD Naoussa, Greece 4-6 September 2026 Poetry Recitations Poetry Awards ...